शनिवार, 10 जनवरी 2009

बाबुल की बिटिया बाबुल से पूछे







बेटियाें की किलकारियां घर आंॅगन को गंुजायमान रखती है। वे अपने जनक के घर आंगन की वह मिट्टी होती हैं, जिनके बिना आंगन का अस्तित्व बेगाना लगता है। बाद में ससुराल जाकर भी वे उस नये घर को अपनी गंध से सुवासित करती है। मान अपमान के बावजुद वे बाबुल के घर को अपने ममत्व,लगााव और प्यार से सींच कर रखती हैं। जब पति के घर जाती हैं तो सारे दुख ,अपमान को भूला,ढेर सारा प्यार लगाव थाती बनाकर अपने साथ ले जाती हैं। जीवन भर बाबुल का घर उसके लिए पूजा के फूल से ज्यादा पवित्र रहता है। सदियों से सांस्कृतिक और सामाजिक परम्पराओं ने कन्या के लिए बाबुल की गली और उसकी ममता छोड़ पराये घर जाने का नियम बनाया है। आज वही कन्या या तो दहेज के लिए ससुराल में मारी जा रही है या बाबुल के घर में कोख में ही दम तोड़ रही है। पूरी मानवता को शर्मसार कर देने वाली ऐसी घटनाएं पूरे देश में गांव गांव में हो रही हैं। इन मासूमों को छेद-छेद कर प्राण लेने में ---- हाथ नहीं कांप रहा। जिस ईश्वर ने सृष्टि की रचना की है, उसने पुरूष और स्त्री को को बनाकर सृष्टि में संतुलन रखने की कोशिश की है, जिसका लाभ हमारा ही है। इसेे बिगाड़ कर हम अपना ही परिवेश खराब कर रहें हैं। क्या लड़कियों के बिना दुनिया की कल्पना की जा सकती हैं कभी देख है बिना बेटियों वाला या बिना गृहण्ी वाला ? उस घर में सबकुछ होते हुए भी वहां कुछ भी नहीं रहता है। उस घर का सारा सौन्दर्य, सारा श्रृंगार, सारी जीवंतता और सारी गरिमा लापता रहती है। बेटियां स्वभावत: ही संतोषी होती हैं। कुछ नहीं मांगती वे अपने पिता से, थोड़ा प्यार भी नहीं, जा उसकी जरूरत है,थोड़ी स्वच्छंदता या समानता कुछ भी नहीं, जो उसका हक है। पर उसे प्यार देने,उसका प्यार पाने, उसे जीने देने खुश होने और कुछ करने का अधिकार तो देना दुर की बात है। हम तो उससे सृष्टि में आने का अधिकार ही छीन रहें हैं, उसकी निर्मम भ्रूण हत्या करके। बेटियों की विदाई का यह कौन सा रुप है?

30 टिप्‍पणियां:

विवेक सिंह ने कहा…

ऊपर प्यारी प्यारी बच्चियों को देखकर खयाल आया कि जिन्हें जन्म से पहले ही मार दिया जाता है वे भी ऐसी ही होंगी . काँप उठते हैं !

सागर नाहर ने कहा…

कभी देख है बिना बेटियों वाला
बिल्कुल देखा है, क्यों कि हमारे यहां ही बेटियां नहीं है और हम बेटियों के स्नेह से वंचित है। बेटियों के बिना घर-घर नहीं लगता।

विनय ने कहा…

मृत संवेदना के साथ जन्मे लोग ही ऐसा करते हैं

---मेरा पृष्ठ
गुलाबी कोंपलें

समयचक्र - महेद्र मिश्रा ने कहा…

मेरी बेटियाँ नही है पर मुझे हमेशा बेटियो की कमी खलती है . बढ़िया भावनात्मक अभिव्यक्ति . धन्यवाद. .

hem pandey ने कहा…

अजहर हाशमी की ये पंक्तियाँ उद्धृत करना चाहूंगा :

मुस्कुरा के पीर पीती हैं
बेटियाँ हर्षित व्यथाएं हैं |
जिनमें ख़ुद भगवान बसता है
बेटियाँ वे वन्दनाएँ हैं ||

राज भाटिय़ा ने कहा…

ऎसा कॄत केवल गिरे हुये लोग ही करते है,साधारण लोग तो ऎसा सोच भी नही सकते.
धन्वाद

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर...आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे .....हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

Abhishek ने कहा…

बहुत ही अच्छी शुरुआत की है आपने. स्वागत ब्लॉग परिवार और मेरे ब्लॉग पर भी. (gandhivichar.blogspot.com)

Rashmi Singh ने कहा…

Ati sundar..keep it up.

VisH ने कहा…

waah maza aa gaya kya likhti hai aap......
from my side three .....Jai Ho..Jai ho...Jai Ho....

Mere blog par bhi padharen


Jai Ho magalmay ho

प्रकाश बादल ने कहा…

स्वागत है आपका।

Abhi ने कहा…

Shelley Ji,
kafi achcha likha hai.
kabhi yaha bhi aaye...
http://jabhi.blogspot.com

आनंदकृष्ण ने कहा…

ब्लोगिंग की दुनिया में आपका स्वागत है. मेरी कामना है की आपके शब्दों को नई ऊंचाइयां और नए व गहरे अर्थ मिलें और विद्वज्जगत में उनका सम्मान हो.
कभी समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर एक नज़र डालने का कष्ट करें.
http://www.hindi-nikash.blogspot.com

सादर-
आनंदकृष्ण, जबलपुर.

प्रकाश गोविन्द ने कहा…

शैली आपने बहुत ही ह्रदयस्पर्शी विषय
चुना इस बार !

क्या कहूँ ?
जब बहुत कुछ कहने को दिल चाहता है न
तब कुछ भी कहने को दिल नहीं चाहता !!!

डायरी के पन्ने पलटने पर
बहुत पहले की लिखी किसी पाकिस्तानी शायर की
नज्म लिखी हुयी दिखायी दे रही है !
लम्बी नज्म है .........
एक बार आप लोग भी पढिये :

बेटियाँ किस के घर में रहती हैं
बन के रहमत जब यह उतरती हैं
धन पराया इस का घर यह नहीं
सुनकर इस तल्खी हकीकत को
फिर भी वो मुस्कराती रहती हैं

मां के आँचल को ओढ़ लेती हैं
उस के सब दुःख संभाल लेती हैं
वो हँसे साथ उस के हंसती हैं
उस की आंखों में अगर आए पानी
अपने दिल में उतार लेती हैं
घर यह उनका नहीं है
सुनकर भी सारा घर संभाल लेती हैं

बाप का मान सारा उनसे है
इज्जत और शान सारी उनसे है
बात जो उनके दिल में होती है
बेटियाँ ख़ुद से जान लेती हैं
अपने भाईयों से प्यार करती हैं
हर खुशी उन पर वार देती हैं
कोई ग़म पास आए न उनके
हर घड़ी इस दुआ में रहती हैं

अपने बाबुल के घर की चिड़िया हैं
दूर कहीं उनका ठिकाना है
फिर भी वो चहचहाती रहती हैं
फूल खुशियों के खिलाती रहती हैं

जितनी भाइयों की सेवा करती हैं
इतना भाई भी उनसे प्यार करते हैं
फिर भी वो फूल अपने आँगन का
क्यूँ किसी और को दे देते हैं

जाते-जाते यह कहानी
वो उस के कानों में उतार देते हैं
फिर लौट कर न आना तुम
एक नया घर बसाना तुम
अब वो घर ही तेरा ठिकाना है
अपने बाबुल को भूल जाना है
तुमने रीत यह निभानी है

मां के सीख की लाज रखनी है
सब के दिल में जगह बनानी है
एक दुनिया नई बसानी है
सारे रिश्तों का नाम रखना है
अपने बाबुल का नाम रखना है

बेटियाँ बे-खता होती हैं
फिर भी वह जाते हुए
बाबुल से अपने हर जुर्म बख्शवाती हैं
मां के कदम चूम कर दुआएं लेती हैं
हर नसीहत दुआएं हर लब की
अपने आँचल से बाँध लेती हैं

जाते हुए पलट कर मुड़ती हैं
अपनी सखियों से सवाल करती हैं
बेटियों का नहीं है घर कोई
फिर ये क्यूँ दिल में घर बनाती हैं
वो सखी यूँ जवाब देती हैं
कौन कहता है इन का घर ही नहीं
बेटियाँ सब के दिल में रहती हैं

मां का आँचल ही घर कभी इनका
बाप के दस्त-ऐ-दुआ में रहती हैं
प्यार भाई का सैबान उनका
और असल घर तो दिल है साजन का
हर जगह उनके दम से रौनक है
बेटियाँ हर जगह पर रहती हैं
घर फकत उनके नाम से बसते हैं
लोग सिर्फ उनके दम से हँसते हैं

बहन बेटी हो मां हो या बीवी हो
यह सिर्फ नाम ही बदलती हैं
असल में बेटियाँ ही होती हैं
पोंछ ले आंसू अपनी आंखों के
सब ठिकाने तेरे ठिकाने है
मायका ससुराल या तेरा साजन
सारे रिश्ते तुझे निभाने हैं
तेरा साजन का दिल ही तेरा घर
अब वो ही तेरा ठिकाना है .........

प्रकाश गोविन्द ने कहा…

माफ कीजियेगा मुझे अंदाजा नहीं था कि
संपादित करने का बावजूद भी प्रतिक्रिया
इतनी लम्बी हो जायेगी !

sandhyagupta ने कहा…

Kya yah aascharyajanak nahin ki aisi ghatnayen kuch ati samriddh rajyon jaise Punjab aur Haryana me, aarthik rup se pichde rajyon jaise Bihar aur Jharkhand ki tulna me jyada ghati hain.

shama ने कहा…

Bohot achha likha hai aapne...
Mere blogpe tippanee deneke liye dhanyawaad...waise wo kahaanee poorn roopme mere mukhya blogpe hai..."The Light By A Lonely Path".
Wahan jo jo shrinkhala shuru kee hai, chahungee ki aap jaisee samvedansheel wyakti zaroor padhe...mai naa lekhak hun na kavi...bas jeevanke anubhav aur rangoko shabdbaddh kar rahee hun...aur ye ki hamaare mulkme betiyon ko aajbhee kitnaa kanishtth samajhaa jaataa hai...uska unki mansiktaape kaisa prabhaw hota hai..
Ab to aapke blogkaa link mil gaya ...baar, baar aatee rahungee...!
Ateev sundar tasveeren hain...chashme-bad- door!!

Dev ने कहा…

बहुत सुंदर..आपने बहुत ही बहुत ही अच्छी शुरुआत की है. आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है.

जीवन भर बाबुल का घर उसके लिए पूजा के फूल से ज्यादा पवित्र रहता है।

धन्वाद

shelley ने कहा…

praksh ji. lambi tippni se pareshan n hon aapne achchhi kavita prastut ki hai

jayram ने कहा…

itne sundar tarike se apni bhawna ki abhiwyakti blog ke alawa kahin aur sambhaw nahi. lekhan ke liye badhayi.... mauka milee to wwww.sachbolnamanahai.blogspot.com par padharen ....

विनय ने कहा…

मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएँ
मेरे तकनीकि ब्लॉग पर आप सादर आमंत्रित हैं

-----नयी प्रविष्टि
आपके ब्लॉग का अपना SMS चैनल बनायें
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Harkirat Haqeer ने कहा…

Betiyon k bina sristi asambhav hai vaise bhi aaj k nalayak beton se betiyan hi mata pita ka adhik dhyan rakhti hai.....pta nahi ye bat purush varg ko samajh kyon nahi aati....?

muskan ने कहा…

betiya pyari hi hoti hai. tabhi to maine bhi apne blog ka nam apni pyari beti ke nam par diya hai

प्रवीण जाखड़ ने कहा…

खूबसूरत लेखन। बेटियां तो घर की रौनक होती हैं। कोई समझे न समझे आप समझती हैं। विचारों को सलाम।

rajesh ranjan ने कहा…

aapka lekhan behad prabhavi hai.

राजीव करूणानिधि ने कहा…

aapne bahut hi jazbaati lekh likha hai.

विनय ने कहा…

बहुत ख़ूब

---
आप भारत का गौरव तिरंगा गणतंत्र दिवस के अवसर पर अपने ब्लॉग पर लगाना अवश्य पसंद करेगे, जाने कैसे?
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KK Yadav ने कहा…

लाजवाब प्रस्तुति ...बधाई !!
कभी हमारे ब्लॉग "शब्द सृजन की ओर" की ओर भी आयें.

"VISHAL" ने कहा…

gahree baat likhi hai aapne, par ab dheeredheere jamana badal raha hai,magar logo ki soch is bare me bahut dheemi gati se badal rahi hai

--------------------------"VISHAL"

Dr. G. S. NARANG ने कहा…

betiyo se pyara duniya me kuch nahi hota. Kuch log beti paane ke pahle maar dete hai, kitna bada paap karte hai. Aur kuch ko ishwar dekar vapas le lete hai......Ab ishwar ko kya kahe?