सोमवार, 22 दिसंबर 2008


नई सुबह के साथ नया कदम








अपने अनुभव से देखा और जाना है अगर आप सच्चाई और ईमानदारी के बल पर आगे बढ़ते हैं तो देनी पड़ती है आपको ख़ुद की आहुति। गर बात करते हों संस्कार और संस्कृति की , रमने लगते हो इनमे तब फ़िर मांगी जाती है आपसे आपकी आहुति । और तो और समिधा की तरह जलना भी ख़ुद ही होता है । चलिये देखते है जीवन यज्ञ में कैसी- कैसी आहुतियाँ हैं ।



4 टिप्‍पणियां:

मीत ने कहा…

सच है आहुती तो देनी पड़ती है...
पर आग में जलने पर ही तो सोना भी कुंदन बनता है...
---मीत

मोहन वशिष्‍ठ ने कहा…

बहुत सही लिखा है आपने
नए ब्‍लाग के लिए शुभकामनाएं
लिखते रहिए
नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

dr. ashok priyaranjan ने कहा…

बहुत अच्छा िलखा है आपने । नए साल में यह सफर और तेज होगा, एेसी उम्मीद है ।

नए साल का हर पल लेकर आए नई खुशियां । आंखों में बसे सारे सपने पूरे हों । सूरज की िकरणों की तरह फैले आपकी यश कीितॆ । नए साल की हािदॆक शुभकामनाएं

मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है- आत्मविश्वास के सहारे जीतें जिंदगी की जंग- समय हो तो पढें और कमेंट भी दें-

http://www.ashokvichar.blogspot.com

विनय ने कहा…

नववर्ष की शुभकामनाएँ