बुधवार, 31 दिसंबर 2008

किसी को न मिले विश्वासघात का जहर



















कहते हैं वक्त हर जख्म भर देता है। गहरे से गहरा ही क्यो न हो। पर मैं इस बात से इत्तेफाक नही रखती। कुछ जख्म तो ऐसे होते हैं जिसकी टीस ता -उम्र ही नही मरने के बाद भी बरक़रार रहती है। ऐसे गहरे जख्म को भरने की ताकत वक्त के पास भी नही होती। ऊपर - ऊपर दिखता जरुर है की जख्म भर गया है पर दरसल होता यह है कि उस जख्म पर वक्त का मरहम ही लगा होता है। मरहम के नीचे छिपा होता है गहरा सा जख्म। इसलिए जैसे ही कोई जख्म कुदेरता है या सिर्फ़ उन जख्मो को छूता ही है तो टीस बढ़ जाती है, लहू निकलने लगता है जख्म फ़िर से कई कई दिनों के लिए फ़िर से हरा हो जाता है। उसके बाद उन जख्मो पर वक्त के साथ सहानुभूति , भावनाओ और अनुभव का लेप लगाकर उनको उस समय तक ढँक दिया जाता है जब तक कि कोई अन्य कुदेर न दे । ऐसा ही जख्म होता है विश्वासघात का । न भरने वाले जख्मो में इसकी भी गिनती होती है। अक्सर विश्वासघात वे ही करते हैं जिनपर आपका अगाध विश्वाश हो। आपने आस- पास अपनों के रूप में रहने वाले विश्वासघातियो को पहचानना बहुत मुश्किल होता है । पर एक बार इनको पहचान लिया जाए तो आपको बहुत सारी असुविधाओ, मानसिक तनाव कार्यो के अवरोध से बचा जा सकेगा। यही वो शास्त्र है जिसे प्रभाव से बचना बहुत मुश्किल।

आज साल का अन्तिम दिन है । मैं चाहती हूँ आने वाले नए साल में सभी ब्लागर साथियो की विश्वासघात से रक्षा हो।







6 टिप्‍पणियां:

समयचक्र - महेद्र मिश्रा ने कहा…

नववर्ष की ढेरो शुभकामनाये और बधाइयाँ स्वीकार करे . आपके परिवार में सुख सम्रद्धि आये और आपका जीवन वैभवपूर्ण रहे . मंगल कामनाओ के साथ .धन्यवाद.

प्रकाश गोविन्द ने कहा…

शैली जी
मेरे ब्लॉग पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए शुक्रिया !
आपने नया ब्लॉग शुरू भी कर दिया और ख़बर भी नहीं दी !

पल-पल से बनते हैं अहसास
अहसास से बनता है विश्वास
विश्वास से बनते हैं रिश्ते !!

विश्वासघात को लेकर आप अत्यन्त व्यथित हैं !
होना भी चाहिए !
मानवीय द्रष्टिकोण से इससे बड़ा कोई अपराध नहीं है जब कोई
आपके विश्वास को यकायक चकनाचूर कर दे ! लेकिन हम सभी
ऐसी स्थितियों से कभी न कभी दो-चार होते हैं !
किया क्या जाए ?
क्या विश्वास करना बंद कर दिया जाए ?
ऐसा सम्भव नहीं है !
क्योंकि विश्वास दिमाग से नहीं दिल से किया जाता है !
जब कोई दिल को ठेस पहुंचाता है तो दुःख तो होता ही है,
साथ ही क्रोध भी !
उपाय सिर्फ एक ही है - क्षमा ! हम क्यों अपना मन भारी रखें, आत्मा पर बोझ तो उसके रहेगा जिसने ग़लत किया है !
विश्वासघाती को भी देर-सवेर अपनी गलती का अहसास होता अवश्य है !
बीता हुआ भुलाकर आगे देखना ही उचित है !

HAPPY NEW YEAR :
कर्म और चिंतन से हम सभी नवीनता को निमंत्रण देने वाले, एक नए द्रष्टिकोण से जीवन को समझने वाले सिद्ध हों, इसी आशा और विश्वास के साथ आपको नए वर्ष की बधाई ! नया वर्ष आपके लिए रचनात्मक संकल्पों को पूरा करने वाला वर्ष हो !

MUFLIS ने कहा…

"..aur aise zakhm ko bharne ki taaqat waqt ke paas bhi nahi hoti.."
bahot hi steek aur sachcha izhaar kiya aapne !

vishwaas ka ujaala kabhi maddam na parhe...
inhi duaaoN ke saath...
naye saal 2009 ki shubh kaamnaayeiN !!

---MUFLIS---

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

आपको एवं आपके समस्त मित्र/अमित्र इत्यादी सबको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाऎं.

अनुपम अग्रवाल ने कहा…

विश्वास हो ,आस हो ,
अब ना मन उदास हो ,

नए साल में शुभकामनाएं .

pramod ने कहा…

vishwasghat usi ke sath hota hai jo kisi par vishwas kare. isse bachne ka seedha formula hai is dunia me kisi par vishwas mat karo.