बुधवार, 1 जुलाई 2009

मैंने देखा कर्नाटक







पिछले दिनों मुझे कर्नाटक जाने का अवसर मिला. जैसा सोचा था उससे अलग लगा वह प्रदेश. हिंदी के प्रति उनका ममत्व आह्लादित कर गया. मैंने वहां धरवार और हुबली सिटी देखा. सबसे ज्यादा अच्छा लगा - लोगें का प्यार. हिंदी प्रदेश की कहकर उन्होंने जो प्यार दिया . उसका कोई जवाब नहीं. सब अपने घर बुलाना चाह रहे थे. हर कोई बात करना चाह रहा था. मुख्या रूप से मैंने उनकर झील, रूपकला बेट्टी और एक आश्रम देखा. केले के पत्तें पर खाना खाना मेरे इए रोमांचक अनुभव था .
उनकर झील में विवेकानंद स्मारक बना है. यह कन्या कुमारी के तर्ज पर बना है . हुबली ब्यवसायिक सिटी है. पर प्रकृति से दूर नहीं है. कलि मिटटी वाली हुबली में चावल की खेती होती होती है. इश्वर में लोगों की आस्था अधिक है. कभी मौका मिले तो जरुर जाएँ. नारियल के पेड़ों से सजे घर आपका स्वागत करेंगे. है
मेरे खिचे फोटो तो अभी नहीं डाल पा रही हू . पर इन फोटो से आप हुबली को देख सकते हो. यहाँ उनकर झील, साईबाबा मंदिर , कृषण मंदिर और एक देवी मंदिर की फोटो है.



11 टिप्‍पणियां:

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

वाह जी आपने तो धर बैठे ही कर्णाटक दर्शन करा दिया. धन्यवाद्.

M VERMA ने कहा…

बहुत मनोरम लगा चित्रो की ज़ुबानी

cartoonist anurag ने कहा…

ahelley ji.....
ye aapne bahut hi achha kiya jo ghar baithe hi darshan kara diye...


aour ek baat is mahgai k jamane main aapne mere kafi paise bhi bach diye.... ab kam se kam vaha ghoomane to nahi jana padega....

aapne jo mera hosla badaya uske liye main dil se aabharee hu...

cartoonist anurag ने कहा…

sorry.... apka nam galat type ho gaya.....

Udan Tashtari ने कहा…

वो तस्वीरें भी चढ़ाओ जो तुमने खींची हैं.

राज भाटिय़ा ने कहा…

जो तस्वीरे अभी देखि बहुत सुंदर लगी, ओर आप ने तो हमेघर बेठे ही वहां के दर्शन करवा दिये, लोगो के बारे जान कर अच्छा लगा.
धन्यवाद

दिगम्बर नासवा ने कहा…

Sundar chitr hain karmaatak ke.....

मनोज गुप्ता ने कहा…

वास्तव में तो आम भारतीय आज भी एक दूसरे के प्रति अत्यंत आत्मीय है. आपके अनुभव से मुझे अपना बैंगलोर का प्रवास याद आ गया. मेरा अनुभव भी आप ही की तरह अत्यंत सुखद रहा था.

प्रकाश गोविन्द ने कहा…

आपने अपनी यात्रा संस्मरण को
पोस्ट के माध्यम से हमसे साझा किया !
आभार !

मेरा कर्नाटक घूमा हुआ है !
घूमने के लिए वहां एक से बढ़कर एक स्थल हैं ! आपका यह कहना बिलकुल सही है .. मेरा भी अनुभव यही है कि उधर के लोगों में इश्वर के प्रति आस्था अधिक है !

काफी समय बाद आपके ब्लॉग पर आना हुआ ... अब लिंक मिल गया है तो आना होता रहेगा !
अगली पोस्ट की प्रतीक्षा है !

आज की आवाज

P.N. Subramanian ने कहा…

सुन्दर यात्रा विवरण. कर्णाटक वैसे भी बहुत अच्छा है

cartoonist anurag ने कहा…

shelley ji.....
ek naya cartoon dala hai......

plz jaroor dekhen...aour apne moolyawan vicharon se mujhe avgat karayen......
dhanyawad........